क्या सट्टा किंग कानूनी है? भारत के कानून और सज़ा
नहीं। सट्टा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और ज़्यादातर राज्यों के कानूनों के तहत गैरकानूनी जुआ है, और 1 मई 2026 से ऑनलाइन मनी गेम की पेशकश और विज्ञापन पर पूरे देश में रोक है।
इस पेज पर (10)
- भारत में जुए पर कानून कौन बनाता है
- कौशल बनाम किस्मत: सट्टे को इससे राहत क्यों नहीं
- राज्यों के कानून: पहले दिल्ली-एनसीआर
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 112: संगठित सट्टा
- ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 और 2026 के नियम
- वेबसाइट और ऐप ब्लॉक करना: आईटी अधिनियम की धारा 69A
- क्या परिणाम देखना गैरकानूनी है?
- ठगी हुई या मुसीबत में हैं? क्या करें
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- स्रोत
नहीं। (25 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति) सट्टा, जिसमें गली, दिसावर, फ़रीदाबाद और गाज़ियाबाद जैसे खेल शामिल हैं, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और ज़्यादातर दूसरे राज्यों के कानूनों के तहत गैरकानूनी जुआ है। 1 मई 2026 से पूरे देश में ऑनलाइन मनी गेम की पेशकश और उनके विज्ञापन पर भी रोक है। यह पेज सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।
इस पेज पर हम बताते हैं कि भारत में जुए पर कानून कौन बनाता है, अलग-अलग राज्यों के कानून क्या कहते हैं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 और ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 में क्या है, और अगर आपके साथ ठगी हुई हो तो क्या करें। यही जानकारी अंग्रेज़ी में Is Satta King legal in India? पर है।
भारत में जुए पर कानून कौन बनाता है
राज्य सूची, प्रविष्टि 34: सट्टा और जुआ
संविधान की सातवीं अनुसूची में 'सट्टेबाज़ी और जुआ' राज्य सूची की प्रविष्टि 34 में है। इसका मतलब है कि इस पर कानून मुख्य रूप से राज्य बनाते हैं। पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था भी राज्यों के विषय हैं, इसलिए सट्टे के खिलाफ़ छापे और गिरफ़्तारियाँ राज्य पुलिस करती है। केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में संसद को यही बताया था।
संघ सूची, प्रविष्टि 40: सरकारी लॉटरी
भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली लॉटरी संघ सूची की प्रविष्टि 40 में आती है और लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 के तहत नियंत्रित है। इसीलिए सरकारी लॉटरी कुछ राज्यों में कानूनी है, जबकि सट्टा नहीं।
अदालतें जुए को 'व्यापार' क्यों नहीं मानतीं
1957 के स्टेट ऑफ़ बॉम्बे बनाम आर.एम.डी. चमारबागवाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुआ res extra commercium है, यानी ऐसा काम जिसे संविधान के तहत संरक्षित व्यापार या कारोबार का दर्जा नहीं मिलता। इसी आधार पर राज्य जुए पर रोक लगा सकते हैं।
कौशल बनाम किस्मत: सट्टे को इससे राहत क्यों नहीं
भारतीय कानून में 'कौशल के खेल' और 'किस्मत के खेल' में फ़र्क किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 1967 के के. सत्यनारायण मामले में रम्मी को "मुख्य रूप से कौशल का खेल" माना, और 1996 के के.आर. लक्ष्मणन मामले में घुड़दौड़ को भी कौशल का खेल माना। लेकिन दो अंकों वाले नंबर का ड्रॉ किसी भी कसौटी पर किस्मत का खेल है: उसमें खिलाड़ी का कोई कौशल नहीं होता। इसलिए सट्टा इस छूट के दायरे में नहीं आता। और ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 तो पैसे वाले ऑनलाइन खेलों पर रोक लगाते समय कौशल और किस्मत का फ़र्क भी नहीं करता (नीचे देखें)।
राज्यों के कानून: पहले दिल्ली-एनसीआर
दिल्ली: दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट, 1955
दिल्ली के कानून में 'कॉमन गेमिंग हाउस' की परिभाषा में वह जगह भी शामिल है जहाँ "बाद में तय या घोषित होने वाले आँकड़ों या नंबरों" पर जुआ होता है, जो सीधे सट्टे जैसे खेलों पर लागू होता है। ऐसी जगह चलाने पर 6 महीने तक की कैद और/या ₹1,000 तक जुर्माना, और वहाँ पाए जाने पर 3 महीने तक की कैद और/या ₹500 तक जुर्माने का प्रावधान है। गली और दिसावर जैसे खेलों से जुड़े दिल्ली के मामले इसी कानून के तहत दर्ज होते हैं (देखें गली और दिसावर पेज)।
उत्तर प्रदेश: पब्लिक गैंबलिंग एक्ट, 1867 (संशोधित)
उत्तर प्रदेश में, जिसमें गाज़ियाबाद और नोएडा आते हैं, 1867 का केंद्रीय कानून राज्य के संशोधनों के साथ लागू है। उत्तर प्रदेश के संशोधन में 'जुए के साधनों' की परिभाषा में "सट्टे की पर्चियाँ" भी शामिल हैं, और कौशल के खेलों वाली धारा 12 की छूट 1917 के एक राज्य कानून से हटा दी गई थी। मई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इमरान खान मामले में कहा कि यह कानून ऑनलाइन सट्टे के लिए पुराना पड़ चुका है और राज्य सरकार से विशेषज्ञ समिति बनाने को कहा। 2025 के कामरान मामले में हाईकोर्ट ने धारा 13 के अपराध को संज्ञेय माना। सज़ा के सटीक आँकड़े हम उत्तर प्रदेश के आधिकारिक कानून पाठ से मिलान के बाद ही देंगे।
हरियाणा: सार्वजनिक जुआ निवारण अधिनियम, 2025
हरियाणा ने 2025 में नया कानून (2025 का अधिनियम संख्या 11) बनाया, जिसने राज्य में 1867 का कानून हटा दिया। यह 21 मई 2025 की अधिसूचना से लागू हुआ और इसमें "इलेक्ट्रॉनिक संचार के ज़रिए" लगाया गया दांव भी शामिल है, जो फ़रीदाबाद जैसे नामों से चलने वाले खेलों पर सीधे लागू होता है।
| अपराध | सज़ा |
|---|---|
| सार्वजनिक जुआ | 1 साल तक की कैद या ₹10,000 तक जुर्माना |
| जुआघर का मालिक होना या उसे पैसा देना | 3 से 5 साल की कैद और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| दोबारा अपराध | 5 से 7 साल की कैद और ₹2 से 5 लाख जुर्माना |
| उकसाना या मदद करना (धारा 6) | मूल अपराध जितनी सज़ा |
राजस्थान और उत्तराखंड
राजस्थान में पब्लिक गैंबलिंग ऑर्डिनेंस, 1949 लागू है। 2021 में ऑनलाइन जुए पर सख्त सज़ा वाला एक विधेयक आया था, लेकिन उसके कानून बनने की पुष्टि हमें नहीं मिली। उत्तराखंड में अप्रैल 2026 के एक मामले में भी 1867 का कानून ही लागू किया गया। राज्य का नया 2026 का विधेयक मार्च 2026 में मंत्रिमंडल से मंज़ूर हुआ; उसके कानून बनने की खबरें हैं, पर वह अभी लागू नहीं हुआ है।
सट्टे के नंबर छापने पर कानून वाले राज्य
कुछ राज्यों के कानून सट्टे के आँकड़े प्रकाशित करने को भी अपराध मानते हैं। बिहार का 2026 का कानून (धारा 10) मटका या सट्टे के अंक "सट्टे के उद्देश्य से या सट्टे में मदद के लिए" छापने पर सज़ा देता है। मध्य प्रदेश के 1976 के संशोधन की धारा 4-A और छत्तीसगढ़ के 2022 के कानून की धारा 6 में ऐसे प्रकाशन के लिए किसी इरादे की शर्त नहीं है। महाराष्ट्र और गुजरात में लागू बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ़ गैंबलिंग एक्ट, 1887 की धारा 12A उस व्यक्ति की गिरफ़्तारी की अनुमति देती है जो "जुए में मदद या सुविधा देने के इरादे से" जानकारी प्रकाशित करता है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 112: संगठित सट्टा
भारतीय न्याय संहिता, 2023, जो 1 जुलाई 2024 से लागू है, की धारा 112 'छोटे संगठित अपराध' से जुड़ी है। इसके तहत किसी समूह या गिरोह के सदस्य द्वारा किया गया अनधिकृत सट्टा या जुआ अपराध है, जिसकी सज़ा 1 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना है। ध्यान दें कि इस धारा के लिए समूह या गिरोह का तत्व ज़रूरी है; अकेले व्यक्ति पर आम तौर पर राज्य का जुआ कानून लागू होता है।
ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025 और 2026 के नियम
प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ़ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025 (2025 का अधिनियम संख्या 32) अगस्त 2025 में पास हुआ और इसे 22 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली। यह अपने नियमों के साथ 1 मई 2026 से लागू है। कुछ शुरुआती खबरों में 1 अक्टूबर 2025 की तारीख दी गई थी, जो एक घोषित लक्ष्य था, लागू होने की तारीख नहीं।
किस पर रोक है: पेशकश, विज्ञापन, भुगतान
कानून की धारा 2(1)(g) के अनुसार 'ऑनलाइन मनी गेम' वह खेल है जिसमें पैसा लगाकर पैसा पाने की उम्मीद हो, "चाहे वह खेल कौशल, किस्मत या दोनों पर आधारित हो"। धारा 5 ऐसे खेलों की पेशकश पर, धारा 6 किसी भी माध्यम में ऐसे विज्ञापन पर जो "प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देता या उकसाता" हो, और धारा 7 उनके लिए भुगतान की सुविधा देने पर रोक लगाती है। ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (OGAI), जो इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का संबद्ध कार्यालय है, ऑनलाइन मनी गेम की सूची रखती है।
सज़ाएँ
| अपराध | सज़ा |
|---|---|
| ऑनलाइन मनी गेम की पेशकश (धारा 5) | 3 साल तक की कैद और/या ₹1 करोड़ तक जुर्माना |
| विज्ञापन (धारा 6) | 2 साल तक की कैद और/या ₹50 लाख तक जुर्माना |
| दोबारा अपराध | इससे ज़्यादा सज़ा |
धारा 5 और 7 के अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं (धारा 10)।
खिलाड़ी पर इस कानून में सज़ा नहीं, पर राज्य कानून लागू
इस केंद्रीय कानून में सिर्फ़ खेलने के लिए कोई अपराध नहीं बनाया गया है; यह पेशकश करने वालों, विज्ञापन करने वालों और भुगतान की सुविधा देने वालों पर केंद्रित है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खेलना कानूनी है। ऊपर बताए राज्य कानून खेलने वालों पर भी लागू होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। सितंबर 2025 में कोर्ट ने अलग-अलग हाईकोर्ट में दायर याचिकाएँ अपने पास मंगवा लीं, और 5 अगस्त 2026 को अंतिम सुनवाई के लिए सहमति दी। 25 अक्टूबर 2026 तक कोई रोक या अंतरिम राहत नहीं दी गई है, यानी कानून पूरी तरह लागू है।
वेबसाइट और ऐप ब्लॉक करना: आईटी अधिनियम की धारा 69A
सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत वेबसाइटें और ऐप ब्लॉक कर सकती है; सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के श्रेया सिंघल फ़ैसले में इस धारा को वैध माना था। सरकार के अनुसार 2022 से मार्च 2025 तक सट्टा और जुआ प्लेटफ़ॉर्म के खिलाफ़ 1,410 ब्लॉकिंग आदेश जारी हुए। मीडियानामा की रिपोर्ट के अनुसार 28 मार्च 2026 तक 8,376 जुआ वेबसाइटें ब्लॉक की जा चुकी थीं। ये अलग-अलग तारीखों के अलग आँकड़े हैं; इन्हें जोड़ा नहीं जाना चाहिए।
क्या परिणाम देखना गैरकानूनी है?
हमें ऐसा कोई कानून नहीं मिला जो प्रकाशित परिणाम सिर्फ़ पढ़ने पर सज़ा देता हो। कुछ राज्यों के कानून सट्टे के उद्देश्य से नंबर प्रकाशित करने को अपराध मानते हैं, और मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के कानूनों में इरादे की शर्त भी नहीं है। अपनी स्थिति के बारे में सवाल हो तो किसी वकील से सलाह लें; हम कानूनी सलाह नहीं देते। यह साइट सिर्फ़ घोषित परिणाम और ऐतिहासिक रिकॉर्ड रखती है: हम कोई दांव नहीं लेते, कोई नंबर नहीं बेचते, किसी ऐप का प्रचार नहीं करते, और किसी खाईवाल या ऑपरेटर से जुड़े नहीं हैं।
ठगी हुई या मुसीबत में हैं? क्या करें
- किसी 'फिक्स' नंबर बेचने वाले, ऐप या वेबसाइट ने पैसे ठगे हों, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत से बैंक पैसा रोक सकते हैं। ठगी की पूरी जानकारी: लीक/फिक्स नंबर ठगी।
- धमकी या हिंसा हो तो 112 पर कॉल करें।
- कोई आपका बैंक खाता या सिम किराए पर माँगे तो मना करें; सरकार के अनुसार इससे गिरफ़्तारी तक हो सकती है।
- अपनी कानूनी स्थिति को लेकर चिंता हो तो वकील से मिलें। ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ़्त कानूनी सहायता भी मिल सकती है।
- सट्टे की वजह से तनाव या कर्ज़ हो तो टेली-मानस 14416 पर मुफ़्त और गोपनीय बात करें, 24 घंटे।
सट्टा किंग क्या है, यह जानने के लिए पढ़ें: सट्टा किंग क्या है।
यह पेज सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। कानून हर राज्य में अलग हैं और अक्सर बदलते हैं। अंतिम समीक्षा: 25 अक्टूबर 2026।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत में सट्टा किंग कानूनी है?
नहीं। सट्टा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और ज़्यादातर दूसरे राज्यों के जुआ कानूनों के तहत गैरकानूनी है। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।
क्या ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 के बाद ऑनलाइन सट्टा कानूनी है?
नहीं। 1 मई 2026 से यह कानून पैसे वाले ऑनलाइन खेलों की पेशकश, विज्ञापन और उनके लिए भुगतान पर रोक लगाता है, चाहे खेल कौशल का हो या किस्मत का। राज्य कानून भी लागू रहते हैं।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सट्टे की सज़ा क्या है?
दिल्ली में कॉमन गेमिंग हाउस चलाने पर 6 महीने तक की कैद और/या ₹1,000 तक जुर्माना है। हरियाणा के 2025 के कानून में सार्वजनिक जुए पर 1 साल तक कैद या ₹10,000 तक जुर्माना और जुआघर चलाने पर 3 से 5 साल तक कैद है। उत्तर प्रदेश में 1867 का संशोधित कानून लागू है।
क्या सिर्फ़ बुकी को सज़ा होती है या खेलने वालों को भी?
ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम सिर्फ़ खेलने को अपराध नहीं बनाता, लेकिन राज्यों के जुआ कानून खेलने वालों पर भी लागू होते हैं, जैसे जुआघर में पाए जाने पर।
क्या किसी राज्य में सट्टा कानूनी है?
हमें ऐसा कोई राज्य नहीं मिला जहाँ सट्टा कानूनी हो। कुछ राज्यों में सरकारी लॉटरी कानूनी है, लेकिन वह एक अलग, नियंत्रित गतिविधि है।
क्या ऑनलाइन सट्टा परिणाम देखना गैरकानूनी है?
हमें ऐसा कोई कानून नहीं मिला जो प्रकाशित परिणाम सिर्फ़ पढ़ने पर सज़ा देता हो। कुछ राज्य सट्टे के लिए नंबर प्रकाशित करने को अपराध मानते हैं। अपनी स्थिति के लिए वकील से सलाह लें।
अगर सट्टा गैरकानूनी है तो सरकारी लॉटरी कानूनी क्यों है?
सरकार द्वारा चलाई जाने वाली लॉटरी संविधान की संघ सूची की प्रविष्टि 40 में आती है और लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 के तहत नियंत्रित है। सट्टा किसी ऐसे कानून के तहत अनुमति प्राप्त नहीं है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम रद्द कर दिया है?
नहीं। चुनौती देने वाली याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं और 25 अक्टूबर 2026 तक कोई रोक या अंतरिम राहत नहीं दी गई है। 5 अगस्त 2026 को कोर्ट अंतिम सुनवाई के लिए सहमत हुआ।
स्रोत
- PIB, MeitY, 26 मार्च 2025 (प्रविष्टि 34, BNS 112, 1,410 ब्लॉकिंग आदेश)
- सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, 23 मार्च 2022 (प्रविष्टि 40, लॉटरी)
- स्टेट ऑफ़ बॉम्बे बनाम आर.एम.डी. चमारबागवाला (1957), इंडियन कानून
- के. सत्यनारायण (1967), इंडियन कानून
- के.आर. लक्ष्मणन (1996), सुप्रीम कोर्ट
- दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट, 1955 (Legitquest)
- पब्लिक गैंबलिंग एक्ट, 1867, उत्तर प्रदेश संशोधनों सहित (Legitquest)
- Verdictum, इमरान खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2025)
- Drishti Judiciary, कामरान मामला: धारा 13 संज्ञेय (2025)
- हरियाणा अधिनियम 11, 2025 का पाठ
- PRS, हरियाणा सार्वजनिक जुआ निवारण विधेयक, 2025
- KS&K, हरियाणा कानून का लागू होना (21 मई 2025)
- MediaNama, राजस्थान ऑनलाइन जुआ विधेयक (2021)
- ETV भारत, देहरादून मामला (अप्रैल 2026)
- Drishti IAS, उत्तराखंड सार्वजनिक जुआ निवारण विधेयक 2026
- बिहार जुआ (निषेध) अधिनियम, 2026 (PRS)
- मध्य प्रदेश पब्लिक गैंबलिंग संशोधन अधिनियम, 1976 (Legitquest)
- छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 2022 (Legitquest)
- गुजरात/बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ़ गैंबलिंग एक्ट, 1887, धारा 12A (Legitquest)
- BNS धारा 112 (courtbook.in)
- ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम, 2025, भारत का राजपत्र
- SCC Online, अधिनियम लागू होने की अधिसूचना, 23 अप्रैल 2026
- PIB, ऑनलाइन गेमिंग नियम 2026 पृष्ठभूमि (अप्रैल 2026)
- PRS, विधेयक सारांश
- SC Observer, ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम को चुनौती
- LiveLaw, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएँ अपने पास मंगवाईं (8 सितंबर 2025)
- कश्मीर ऑब्ज़र्वर/PTI, अंतिम सुनवाई पर सहमति (5 अगस्त 2026)
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015), इंडियन कानून
- MediaNama, 8,376 जुआ वेबसाइटें ब्लॉक (अप्रैल 2026)
- PIB, MHA, 1930 और cybercrime.gov.in, 22 जुलाई 2026
- PIB, I4C चेतावनी: बैंक खाता किराए पर न दें, 28 अक्टूबर 2024
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